2019 के लोकसभा चुनावों में क्या रहेगी सोशल मीडिया की भूमिका?

2019 का लोकसभा चुनाव अब बहुत अधिक दूर नहीं है. 2014 के चुनावों में सोशल मीडिया ने बड़ी भूमिका निभाई थी. क्या 2019 में भी सोशल मीडिया बड़ी भूमिका निभाएगा? इस लेख में हम इसी बात की पड़ताल करने का प्रयास करेंगे और उन टूल्स के बारे में भी बात करेंगे जो लोगों को प्रभावित करते हैं.

फेसबुक – फेसबुक भारत में बहुत अधिक लोकप्रिय है. माना जाता है कि 2014 के चुनाव में फेसबुक ने बड़ी भूमिका निभाई थी. हालांकि फेसबुक पर अमेरिकी चुनावों को लेकर आरोप भी लगे थे. सभी पार्टियां और नेता फेसबुक पर अधिक से अधिक लोगों को अपने पक्ष में करना चाहते हैं. एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 30 करोड़ लोग फेसबुक पर एक्टिव हैं. यानि करीब 30 फीसदी वोटर इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं.

खतरा और बचाव – फेसबुक पर कई बार ऐसी सामग्री देखने को मिलती है जो किसी धर्म, जाति, संप्रदाय आदि को ठेस पहुंचाती दिखाई देती है. फेक न्यूज़ को भी फेसबुक के जरिए बहुत अधिक बढ़ावा मिला है. ऐसे में इस बात का खतरा बना हुआ है कि 2019 के चुनावों में भी इस टूल को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि फेसबुक ने इस दिशा में काफी काम किया है लेकिन फिर भी अभी बहुत काम करना बाकी दिखता है.

व्हाट्सएप –  इन दिनों रोजाना टीवी पर विज्ञापन दिखाए देते हैं- खुशियां बांटिए अफवाहें नहीं. यकीनन व्हाट्सएप फेसबुक से भी अधिक पर्सनल टूल है और इसी कारण अधिक प्रभावित करने की भी क्षमता रखता है. एक अनुमान के मुताबिक भारत के करीब 20 से 30 करोड़ लोग व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं. इस टूल के माध्यम से फेक न्यूज़, अफवाहें, गलत वीडियो फैलाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं.

खतरा और बचाव- व्हाट्सएप, फेसबुक से अधिक खतरनाक साबित हुआ. देश के कई इलाकों में तो इस टूल के कारण हिंसा भी फैली. यही कारण है कि जब कहीं हिंसा और अफवाहें फैलने की आशंका होती है तब प्रशासन सबसे पहले इंटरनेट पर रोक लगाता है. हिंसा और धार्मिक उन्माद से जुड़ी फर्जी खबरें और अफवाहें इस टूल के माध्यम से फैलाई जाती हैं. हालांकि अब व्हाट्सएप इस पर काम कर रहा है. लेकिन फिर भी ये टूल 2019 के चुनावों में बड़ी भूमिका निभाने वाला है.

न्यूज़ एग्रीगेटर्स – देश में कई न्यूज़ एग्रीगेटर्स काम कर रहे हैं. इनमें से कुछ देसी हैं और कुछ विदेशी. सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स, सेलिब्रिटी, कई बड़े पत्रकार इनके साथ जुड़े हुए हैं. देश का एक बड़ा तबका इन एप्लीकेशन्स को इस्तेमाल करता है. 2019 के चुनावों में ये न्यूज़ एग्रीगेटर्स क्या भूमिका निभाएंगे ये काफी साफ नहीं है लेकिन जो लोग इनको इस्तेमाल करते हैं वो इनकी खबरों को सच और सही मानते हैं. हालांकि फेक न्यूज़ इन पर बड़ी संख्या में होती हैं.

यूट्यूब- यूट्यूब के प्लेटफार्म पर कई तरह की सामग्री है. अश्लीलता, हिंसा को बढावा देने वाली सामग्री तो है ही राजनीतिक सामग्री भी है. इस तरह के वीडियोज का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित और भ्रमित करने के लिए क्या जाता है. यूट्यूब इनको हतोत्साहित करने के लिए बेहद कम विज्ञापन देता है और कम पैसे भी देता है. इसके बाद भी यूट्यूब पर खास तरह की विचारधाराओं को प्रचारित किया जाता है.

अफवाहों और फेक न्यूज़ से बचें- इनके अलावा भी अन्य एप्स पर ऐसी सामग्री उपलब्ध है. जाति, धर्म, राजनीतिक विचारधाराओं से संबंधित सामग्री आपको कई प्लेटफॉर्म्स पर मिल सकती है. आपको इस सामग्री से बचना है और सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करना है. सोशल मीडिया को जोड़ने के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, बांटने के लिए नहीं.