अपनों से दूर कर रहा है स्मार्टफोन, वक्त रहते संभल जाएं वरना…

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दो सहेलियां थीं, रोजाना फोन पर बातें किया करती थीं. कभी दुख बांटती थीं तो कभी दर्द. फिर स्मार्टफोन का जमाना आया. दोनों ने सोशल मीडिया अकाउंट्स बना लिए. अब उनकी बातें बहुत कम होती हैं. वो एक दूसरे को फोटो फेसबुक पर देख लेती हैं, इंस्टाग्राम पर देख लेती हैं, लेकिन अब फोन कभी कभार ही होता है. उन्हें लगता है कि वो तो अपनी सहेली की हर बात, हर पल, हर खुशी को देखती हैं. लेकिन क्या वाकई ऐसा है. जो दुख-दर्द की बातें फोन पर होती थीं वो कहां गईं.

सोशल मीडिया पर सब कुछ अच्छा ही होता है. लोग घूमने जाते हैं तो फोटो शेयर करते हैं, खाने-पीने की फोटो शेयर करते हैं. सड़कों और मॉल में जहां-तहां सेल्फियां लेते हैं और फिर उनको शेयर करते हैं. सोचिए जरा कि हम ऐसा क्यों करते हैं. क्या हम सिर्फ अच्छी बातें और पहलू ही दिखाना चाहते हैं?

आपको पता है ना कि स्मार्टफोन हर सेकेंड आप पर नजर रखता है. आप कहां गए थे, कितना चले थे, किस दिन कौन सी फोटो खींची थी, कहां खींची थी, कौन से वीडियो देखे थे, कौन से गाने सुने थे, किस रेस्टोरेंट से क्या ऑर्डर किया था. आपके फोन को सब कुछ पता है. वो धीरे-धीरे आपके जीवन में बहुत गहरी पैठ बना चुका है.

लैंडलाइन या बेसिक फोन पर जो दुख दर्द वाली बातें होती थीं वो अब नहीं होतीं. मोबाइल पर जो प्यार मुहब्बत वाली बातें होती थीं वो भी कम हो गई हैं. अब तो स्मार्टफोन पर सब कुछ स्मार्ट है. बच्चा दूसरे शहर में है, फोन नहीं करता तो क्या हुआ सोशल मीडिया पर फोटो तो शेयर करता है ना.

दोस्त दूर रहते हैं लेकिन हम उन्हें फोन नहीं करते, केवल फोटो लाइक करके काम चला लेते हैं. हमें नहीं पता कि उसका जीवन कैसा चल रहा है लेकिन हमें ये पता है कि वो कब वीकेंड पर मूवी देखने गया था. उसने चेकइन तो शेयर किया था ना. पहले लोग शादी के कार्ड देने तो घर आते थे कम से कम अब तो वो भी व्हाट्सएप पर भेज देते हैं.

क्या तकनीक ने हमें सही में एक दूसरे से कनेक्ट किया है या फिर दूर कर दिया है. आपको क्या लगता है?