एक बार फिर हिन्दुत्व के रास्ते दिल्ली की सत्ता तक पहुंचेगी बीजेपी?

प्रयागराज में चल रहे कुंभ (अर्धकुंभ) मेले में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं पर यूपी सरकार ने फूलों की बारिश कराई. इससे पहले कांवड़ियों पर भी सरकार ऐसी पुष्प वर्षा करा चुकी है. अयोध्या में दिवाली पर दीपक जलाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. सरयू नदी के किनारे राम प्रतिमा स्थापित करने की भी बात कही गई. क्या बीजेपी एक बार फिर हिन्दुत्व की सीढ़ी पर चढ़ कर सत्ता तक पहुंच पाएगी?

पिछले काफी वक्त से राम मंदिर का मुद्दा काफी गरम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के अन्य नेता भी इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर चुके हैं. पीएम ने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला की अंतिम और मान्य होगा. ऐसा ही बीजेपी के अन्य जिम्मेदार नेताओं ने कहा. हालांकि बीजेपी के काफी नेता इस मामले में तीखी बयानबाजी करते दिखाई दे जाते हैं.

बीजेपी के स्टार प्रचारक और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से अब तक काफी ऐसे काम किए हैं जो उन्हें हिन्दू हृदय सम्राट बनाने के रास्ते पर ले जा रहे हैं. यूपी की रोडवेज बसों को भगवा कराया गया, कुछ थाने-चौकियों पर भी भगवा रंग चढाए जाने की खबरें सामने आईं, लखनऊ की कुछ सरकारी बिल्डिंगों को भी भगवा कर दिया गया.

मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदला गया, फैजाबाद का नाम अयोध्या कर दिया गया, इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया. यानि ऐसे काफी काम किए गए जिनसे सीएम योगी की छवि ‘हिन्दू नेता’ की बनी. अब यही कारण रहा कि जहां जहां विधानसभा चुनाव हुए वहां योगी को प्रचार के लिए बुलाया गया.

तेलंगाना से लेकर राजस्थान तक और मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक में योगी ने चुनाव प्रचार किया. योगी के भाषणों ने कमाल भी दिखाया और बीजेपी के पक्ष में वोट पड़े. जहां-जहां योगी ने प्रचार किया वहां के अधिकांश उम्मीदवार जीत गए. जहां पीएम मोदी ने अपनी छवि को विकास पुरुष की छवि में बदला है वहीं सीएम योगी को अपनी कट्टर छवि से कोई परहेज नहीं रहा है.

यूपी में जिस तरह से सपा-बसपा में गठबंधन हुआ है और माना जा रहा है कि दलित और मुस्लिम वोट गठबंधन के पक्ष में जा सकते हैं, सीएम योगी पर बड़ी जिम्मेदारी है. देखना ये होगा कि यूपी में 2019 लोकसभा चुनाव के क्या परिणाम सामने आएंगे.