वरुण गांधी क्या कभी कांग्रेस में होंगे शामिल? चर्चाएं तो जोरों पर हैं

वरुण फिरोज़ गांधी, इन दिनों वो अपना नाम यही लिखते हैं. वरुण क्या कभी कांग्रेस में शामिल होंगे? बताया जाता है कि प्रियंका के साथ वरुण के बहुत अच्छे रिश्ते हैं और राहुल गांधी के साथ भी उनकी अच्छी बातचीत है. क्या अब गांधी परिवार एक हो जाएगा और राहुल, प्रियंका के साथ वरुण भी मंच पर नजर आएंगे?

माना जा रहा है कि एमपी के सीएम और कांग्रेसी दिग्गज नेता कमलनाथ दोनों परिवारों को एक करने की कोशिशों में हैं. कमलनाथ के रिश्ते दोनों ही परिवारों के साथ बेहद अच्छे बताए जाते हैं.

आगे क्या होगा कोई नहीं जानता लेकिन चर्चाएं जोरों पर हैं. बीजेपी में पिछले पांच सालों से वरुण जिस तरह हाशिए पर दिखते हैं उससे इन चर्चाओं ने और भी ज़ोर पकड़ा है. एक वक्त था जब वरुण गांधी की इमेज फायरब्रांड नेता के तौर पर बन गई थी.

साक्षी महाराज, उमा भारती और गिरिराज सिंह जैसे नेताओं से भी पहले वरुण गांधी की चर्चाएं हुआ करती थीं. एक वक्त था जब वरुण गांधी खुद को कट्टर हिन्दू बताते थे और ‘ऊंची मीनारों’ पर बयान दिया करते थे.

इन दिनों ऐसा नहीं है. वो सामाजिक न्याय की बात करते दिखते है, रोहिन्ग्या मुसलमानों की बात करते दिखते हैं, किसानों और मजदूरों की बात करते दिखते हैं, गरीबों की बात करते दिखते हैं.

वरुण गांधी, गांधी परिवार से हैं. उनके पिता संजय गांधी को भला कौन नहीं जानता. उनकी मां मेनका गांधी एक जानी पहचानी राजनेता हैं. वरुण फिलहाल सांसद हैं लेकिन उनकी हसरतें ऊंची हैं. यकीनन वे लायक भी हैं.

एक वक्त वो बीजेपी में तेजी से उभर रहे थे, माना जा रहा था कि या तो बीजेपी उन्हें यूपी में सीएम कैंडिडेट के रूप में पेश करेगी या फिर उन्हें केंद्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी. लेकिन दोनों में से कुछ नहीं हुआ.

आखिर ऐसा क्या हुआ कि वरुण गांधी को धीरे-धीरे फ्रेम से बाहर कर दिया गया. वरुण ने अपना पूरा ध्यान पढ़ने-लिखने पर लगाया. उन्होंने किताबें लिखीं, अखबारों के संपादकीय पन्ने पर लिखा और अपने इलाके में लोगों के लिए काम किया.

उन्होंने इस बीच कुछ ऐसे बयान भी दिए जिनका अर्थ बगावत के रूप में निकाला गया लेकिन हाल ही में उन्होंने साफ कहा कि बीजेपी ने उन्हें सम्मान दिया है.

देखना ये होगा कि अब उनके कांग्रेस में जाने की जो चर्चाएं हो रही हैं वो सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेंगी या फिर वाकई कोई चमत्कार होगा. अगर ऐसा होता है तो इसे निश्चित रूप से बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जाएगा.