बूढ़े मां-बाप को कांवड़ यात्रा कराने निकले दो भाई, हर ओर हो रही चर्चा

शामली: आपने श्रवण कुमार की कहानी सुनी है? अगर नहीं तो पहले इस कहानी को पढ़िए जिसने लोगों को श्रवण कुमार की याद दिला दी. श्रवण कुमार के माता-पिता अंधे थे. वे अपने माता-पिता को लेकर तीर्थ यात्रा कराने के लिए निकले थे.

अयोध्या के पास राजा दशरथ का तीर गलती से श्रवण कुमार को लग गया था जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी. उनके माता-पिता ने दशरथ को श्राप दिया था कि जैसे हम अपने बेटे के वियोग में तड़प रहे हैं ऐसे ही आप भी तड़पोगे.

उत्तर प्रदेश के शामली में एक कांवड़ ने लोगों का दिल जीत लिया. जिसमे 2 सगे भाई अपने बूढ़े मां बाप को अपने कंधों पर लेकर हरिद्वार से चलकर पानीपत जा रहे है.

बूढ़े मां बाप को अपने कंधों पर लेकर जाते इन बेटों का नाम ब्रजबीर व पप्पन है, जो पानीपत जिले के विद्या नगर कॉलोनी के निवासी है. दोनों सगे भाई 1 अगस्त को हरिद्वार इस पावन कांवड़ यात्रा को लेकर चले थे.

बब्बन का कहना है कि माता-पिता की सेवा मेरा धर्म है, इसीलिए उनको कांवड़ में बैठाकर लाया हूं. वहीं माता पिता ने भी बेटे के इस प्रण की खूब सराहना की और उसे भरपूर आशीष दिए.

बब्बन ने बताया कि उसका सपना था कि वह अपने मां बाप को ऐसी ही धार्मिक यात्रा कराए। इस बार कांवड़ यात्रा में बब्बन ने अपना यह सपना पूरा किया.

शामली पहुंचने पर शिव भक्तों ने बोल बम का जयघोष करके कांवडिया का स्वागत किया. इस कांवड़ को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.