आपस में लड़ने की जगह आतंक से लड़िए, वरना देर हो जाएगी

Photo by Fancycrave.com on Pexels.com

पुलवामा अटैक के बाद कुछ लोगों में कश्मीरी और मुस्लिमों के प्रति नफरत दिखाई दी. खास तौर पर सोशल मीडिया में. साथियों, ये वक्त आपसी मतभेद का नहीं है. पाकिस्तान समेत आतंकी संगठन भी ये चाहते हैं कि हम लोग आपस में लड़ें और दुनिया में भारत की छवि खराब हो. साथ ही जब ऐसा होगा तो हम अंदरुनी रूप से कमजोर हो जाएंगे और उनके लिए कब्जा और जीत आसान हो जाएगी.

अगर हम अपने देश का हाल सीरिया जैसा नहीं चाहते हैं तो हमें जाति और धर्म के बेड़ियां तोड़नी होंगी. जेंडर इक्वैलिटी को महत्व देना होगा. सभी लोग, सभी भारतीय अगर एक साथ आतंक का मुकाबला करेंगे तो जीत हासिल होगी लेकिन अगर एक कड़ी भी कमजोर रह गई तो मुकम्मल जीत मुमकिन नहीं हो पाएगी.

कश्मीर में चुनिंदा लोगों से बात करने की जगह वहां की जनता से बात की जानी चाहिए. वहां बड़े पैमाने पर रैलियां, छोटी सभाएं, नुक्कड़ नाटक, आदि किए जाने चाहिए. देश के सभी नेताओं का फर्ज है कि वो कश्मीर के अलग अलग इलाकों में जाएं और वहां के आवाम से बातें करें. उनकी परेशानी को समझें और फिर सर्वदलीय बैठकों में राजनीति से ऊपर उठ कर देश हित में फैसले किए जाएं.

इसे भी पढ़ें- पुलवामा अटैक: आतंक को देश भर में फैलने से कैसे रोका जाए

कश्मीर में बड़े पैमाने पर विकास किया जाए, सिनेमा और पर्यटन को वहां बढ़ावा दिया जाए. वहां तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जाना चाहिए. बेहद मजबूत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से अलगाववादियों की पहचान की जानी चाहिए. लोगों के बैंक खातों पर नजर रखी जानी चाहिए. हर चौराहे पर एचडी सीसीटीवी लगाए जाने चाहिए. ड्रोन की मदद से निगरानी की जानी चाहिए.

इस्लाम के बड़े विद्वानों को कश्मीर भेजना चाहिए ताकि वे लोग वहां के स्थानीय युवकों को भटकने से रोक सकें साथ ही उन्हें इस्लाम की अच्छी शिक्षाएं दे सकें. देश भर के सूफी-संतों को इसके लिए तैयार किया जाना चाहिए. उनकी रिकॉर्डिंग्स को, वीडियो जिनमें अच्छी बातें हों उन्हें कश्मीर में फैलाया जाना चाहिए. फिल्मी सितारों और समाज सेवियों की भी मदद ली जानी चाहिए.

देश के हर गांव, हर मुहल्ले में छोटी टीमें तैयार की जानी चाहिए जो हर थोड़े-थोड़े दिनों में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा बैठकों का आयोजन कराएं. ऐसे सम्मेलनों से लोग एक दूसरे के धर्मों के बारे में जान और समझ पाएंगे साथ ही उनका सम्मान करना भी सीखेंगे. मदरसों में पंचतंत्र आदि कहानियां भी बच्चों को बताई जानी चाहिए. मदरसों के पाठ्यक्रम को आधुनिक हिसाब से तैयार करने में इस्लामिक विद्वानों की मदद ली जानी चाहिए.

ये जो अक्सर मुस्लिम बस्तियों से पटाखे चलाने, पाकिस्तान की तारीफें करने की खबरें सामने आती हैं इनको नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. पुलिस, प्रशासन को भी इन पर खासी नजर रखनी चाहिए और इन मुहल्ले के लोगों को भी ताकि सभी मुसलमानों को एक चश्मे से नहीं देखा जाए. जो लोग ऐसी हरकतों में शामिल हों उन्हें काउंसलिंग सेंटर्स में भेजा जाना चाहिए.