पुलवामा अटैक: आतंक को देश भर में फैलने से कैसे रोका जाए

सोशल मीडिया पर हो रहे युद्ध को अभी कंट्रोल करना पड़ेगा वरना देर हो जाएगी

फोटो- ANI

पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद देखने में आया कि काफी लोगों ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और विवादित बातें लिखीं. ऐसे लोगों पर एक्शन भी लिए गए. दूसरी तरफ जो लोग इनसे नाराज थे उन्होंने भी अपनी सीमाएं पार कीं. धर्म और क्षेत्र को लेकर टिप्पणियां की गईं. सरकार को चाहिए कि वक्त रहते इस तरह की चीजों पर काबू करे.

सबसे पहला काम जो सरकार को करना चाहिए वो है सोशल मीडिया मॉनिटिरिंग. बहुत से लोग इसे जायज नहीं मानेंगे लेकिन तकनीक की इस दुनिया में हम बीच का रास्ता निकाल सकते हैं. अगर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आपत्तिजनक और विवादित बातों की जानकारी सरकार तक पहुंचा दे तो इसमें गलत क्या है. सरकार को जैसे ही ये जानकारी मिले उसे तुरंत एक्शन लेना चाहिए.

बात एक्शन की है तो इसका अर्थ ये नहीं कि टिप्पणी करने वाले शख्स को गिरफ्तार करो और जेल में डाल दो. एक्शन का अर्थ ये है कि उसे ढूंढा जाए और काउंसलिंग सेंटर भेजा जाए. देश में ऐसे काउंसलिंग सेंटर बनाए जाने चाहिए. यहां उस शख्स को सही और गलत के बीच का फर्क बताया जाए और प्यार से समझाया जाए. इसके लिए धर्म की भी मदद ली जानी चाहिए.

चूंकि देखने में आया है कि धर्म के नाम पर लोगों को आतंक के लिए उकसाया जाता है, और जो लोग सोशल मीडिया आदि पर विवादित, आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं वो भी धर्म की बातें करते हैं इसलिए ऐसे लोगों को समझाने, इनकी काउंसलिंग के लिए भी धर्म से जुड़े लोगों की मदद ली जानी चाहिए. इन लोगों को धर्म की सही परिभाषा सिखानी चाहिए और धर्म के नाम पर हिंसा से इनका ध्यान हटाना चाहिए.

अक्सर देखने में आता है कि सोशल मीडिया पर बहुत से लोग ऐसे लोगों से भिड़ जाते हैं और धर्म, क्षेत्र आदि पर विवादित बातें करते हैं. ऐसे लोगों की भी पहचान होनी चाहिए. और जो भी हिंसक या गलत किस्म के कमेंट कर रहा है उसे भी ऐसे ही सेंटरों में भेजा जाना चाहिए. ऐसे लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिए जाने चाहिए.

अंत में बात कश्मीर सॉल्यूशन की. कश्मीर में सबसे पहले विकास कार्य हों और पर्यटन के लिए लोगों को बुलाया जाए. जब पैसे का फ्लो कश्मीर में होगा, वहां के लोगों को रोजगार मिलेगा तो शायद हिंसा से उनका ध्यान हट पाए. सरकार को चाहिए कि कश्मीर के किसानों, युवाओं, मजदूरों, घूमंतू समुदायों आदि के लिए सेमिनार रखे, उन्हें हुनरमंद बनाया जाए, उन्हें रोजगार दिया जाए.