कैंसर से सिर्फ सितारे ही नहीं लड़ते, आम जनता भी लड़ती है

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आपने भी ऐसी खबरें देखी होंगी जिनमें फिल्मी सितारों के कैंसर से लड़ने के बारे में बताया जाता है. यकीनन कैंसर सभी के लिए बुरा होता है लेकिन कैंसर से सिर्फ फिल्मी सितारे ही नहीं बल्कि आम जनता भी जूझती है. इन दिनों भारत में इस बीमारी ने तेजी से पैर फैलाए हैं और बहुत सारे लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया है.

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 10 लाख मरीज कैंसर की बीमारी का इलाज कराते हैं. अगले 18 सालों में भारत में कैंसर की बीमारी का खतरा 70 फीसदी तक बढ़ सकता है.

cancerindia.org.in के मुताबिक भारत में कैंसर से पीडि़त लोगों की अनुमानित संख्या करीब 25 लाख है. हर साल करीब सात लाख नए मरीजों के बारे में पता चलता है और 5,56,400 की मौत हो जाती है.

rajswasthya.nic.in के मुताबिक भारत में एक लाख की जनसंख्‍या पर 70 से 80 व्‍यक्ति कैंसर से पीडित हो जाते हैं. भारत में कैंसर से मरने वाले व्‍यक्तियों में 34 प्रतिशत लोग धूम्रपान/ तम्‍बाकू के सेवन करने वाले होते हैं.

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल 90 हजार लोग काल के गाल में समा जाते हैं. बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कई शहरों में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि ये लोगों को वक़्त से पहले मार रहा है.

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इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में वो लोग भी आ रहे हैं जो धूम्रपान नहीं करते. दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा जैसे उत्तर भारतीय शहर प्रदूषण के सबसे ज़्यादा शिकार हैं.

इन आंकडों से साफ है कि भारत में कैंसर, महामारी के स्तर तक पहुंच रहा है. बहुत सारे लोग कैंसर से मर रहे हैं, लड़ रहे हैं, जूझ रहे हैं लेकिन चर्चा केवल सेलिब्रिटीज़ की हो रही है. कैंसर बुरी बीमारी है और किसी को भी कैंसर होना बुरा है लेकिन फिल्मी सितारों की चर्चा के बीच इन आंकडों पर ठीक से गौर नहीं हो पाता.

जिनके पास पैसा है वो तो इस बीमारी से भिड़ जाते हैं, विदेश में बेहतर इलाज करा लेते हैं और इंस्टाग्राम में फोटो शेयर कर खबरों, सुर्खियों में भी आ जाते हैं. लेकिन उनका क्या जो तिल-तिल कर मर रहे हैं. कई लोगों को तो उस वक्त पता चलता है जब वक्त हाथ से निकल चुका होता है.

अगर शुरुआती दौर में भी इस बारे में पता चल जाए तो इसका इलाज कहां होगा, कैसे होगा पता करने में बहुत वक्त बीत जाता है. गरीब जैसे तैसे अपना तमाम पैसा लगाकर कोशिश भी करता है लेकिन संसाधनों की कमी उसकी जान ले लेती है. बहुत कम खुशनसीब ही होते हैं जो कैंसर को हरा पाते हैं.