क्या दलितों को सिर्फ खिचड़ी के जरिए साधा जा सकता है?

यूपी में बीजेपी दलितों को खिचड़ी खिलाएगी. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक दलित बस्तियों में खिचड़ी भोज का आयोजन किया जाएगा जो 25 फरवरी तक चलेगा. 26 फरवरी को उन दलितों के घर कमल दीप जलाए जाएंगे जिनको सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है.

इसके बाद मार्च में अनूसूचित मोर्चे के सम्मेलन होंगे. कमल संदेश यात्रा निकाली जाएगी. आज तक की एक खबर के मुताबिक सपा-बसपा गठबंधन की काट के लिए बीजेपी ये खिचड़ी कार्यक्रम कर रही है और दलितों के दिल तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

इस खबर के जरिए ये जानकारी भी दी गई है कि उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी 17 आरक्षित सीटों पर जीत दर्ज की थी.

इसी तरह सूबे के 2017 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी कामयाब रही. प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटों में से 86 सीटें आरक्षित हैं, जिसमें से बीजेपी 76 सीटें जीतने में सफल रही थी.

अब कुछ जरूरी सवाल- ये क्यों मान लिया जाता है कि किसी जाति का वोटर किसी खास पार्टी के पक्ष में होता है? यादव, सपा के पक्ष में क्यों माने जाते हैं और दलित, बीएसपी के पक्ष में क्यों माने जाते हैं? ऐसा क्यों माना जाता है कि कथित ऊंची जातियों के लोग बीजेपी के वोटर होते हैं?

ऐसा क्यों है कि जाति के आधार पर वोट डाले जाते हैं और मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. क्या बीजेपी के खिचड़ी खिलाने से दलित वोट उसे मिल जाएंगे? तब तो किसी भी पार्टी के लिए ये काफी आसान है. खिचड़ी खिलाओ, वोट ले जाओ.

पिछले 5 सालों में दलित उत्पीड़न के काफी मामले सामने आए हैं. गुजरात से लेकर महाराष्ट्र तक और यूपी के भी कई इलाकों से ऐसे मामले सामने आए हैं. RSS चाहता है कि हिन्दुत्व के नाम पर देश की सभी जातियों को एक किया जाए ताकि सरकार बनाने में आसानी हो.

इसके बीच ‘मूल निवासी’, बहुजन, मनुस्मृति, वर्ण व्यवस्था, आरक्षण जैसे मुद्दे भी अचानक से सामने आते हैं. दलितों का एक बड़ा वर्ग इनसे प्रभावित भी होता है. चंद्रशेखर जैसे नए दलित नेता का उद्य होता है. इसके अलावा और तमाम लोग भी दलित हितैषी होने का दम भरते हैं.

इन सब चीजों से बीजेपी को नुकसान होता है ये बात उसे पता है. इसलिए बीजेपी इस कार्यक्रम को कर रही है ताकि बहुत से मुद्दों पर अपनी बात दलितों तक पहुंचाई जा सके. खास तौर पर आरक्षण संबंधी बात. ये मुद्दा उसे 2019 के चुनाव में काफी परेशान कर सकता है.

अगर बीजेपी को दलित वोट चाहिए तो केवल खिचड़ी से काम नहीं चलेगा. उसे काफी मेहनत करनी होगी. दलित समाज को विश्वास दिलाना होगा कि उनके साथ भेदभाव नहीं होगा. पार्टी के कुछ प्रमुख पदों पर दलितों को बैठाना होगा. सुनिश्चित करना होगा कि पार्टी के संगठन में दलित हिस्सेदारी हो. टिकट बंटवारे में भी ये बात दिखनी चाहिए.