क्या अब हमारे देश में भी बनने लगा है प्रोपेगेंडा वाला सिनेमा?

बात सिर्फ सवाल की क्योंकि जवाब हमारे पास भी नहीं है. ये चर्चाएं हैं जो सोशल मीडिया के गलियारों में तैर रही हैं. एक वर्ग विशेष कुछ फिल्मों को प्रोपेगेंडा सिनेमा बता रहा है तो दूसरा वर्ग इससे इंकार कर रहा है.

सबसे पहले बात उरी फिल्म की. ये फिल्म सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी है. चर्चाएं हैं कि जान बूझ कर इस फिल्म को चुनाव से थोड़ा पहले रिलीज किया गया है ताकि इससे एक पार्टी विशेष के पक्ष में माहौल बनाया जा सके.

चर्चाएं हैं कि फिल्म में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिमामंडन किया गया है. जिस तरह से पीएम ने अपनी चुनावी रैलियों में बार-बार सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र किया है उन बातों की भी सोशल मीडिया पर चर्चाएं हैं.

इसके ठीक पहले ‘एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ नाम की फिल्म की चर्चाएं हुईं. आरोप लगाया गया कि फिल्म कांग्रेस पार्टी की छवि खराब करने के लिए बनाई गई है. कई जगहों पर तो विरोध प्रदर्शन भी हुए.

फिल्म रिलीज हुई, लेकिन खास चल नहीं पाई. हालांकि अनुपम खेर के अभिनय की तारीफ की गई. इस फिल्म को एक किताब के हवाले से बनाया था. फिल्म पर मीडिया की भी खास निगाहें बनी रहीं.

वैसे हमारे देश में बहुत अधिक राष्ट्रवादी सिनेमा बनता नहीं है. सेना पर भी अधिक फिल्में नहीं बनतीं. आपको ध्यान होगा कि जब ‘सुई धागा’ नाम की फिल्म आई थी तब भी सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं थीं कि फिल्म मोदी सरकार की योजना का प्रचार करती हुई लगती है.

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इससे पहले अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर की ‘टॉयलेट’ नाम की फिल्म आई थी तब भी यही कहा गया था कि फिल्म सरकारी योजनाओं के प्रचार के अलावा कुछ नहीं है.

जॉन अब्राहम की फिल्म परमाणु के बारे में भी यही चर्चाएं थीं. फिल्म देश के परमाणु शक्ति बनने की कहानी पर बेस्ड थी और यह तो सभी जानते हैं कि परमाणु परीक्षण एनडीए सरकार के दौरान किए गए थे.

2017 में एक फिल्म आई थी बादशाहो. फिल्म में एक कैरेक्टर को संजय गांधी जैसा दिखाया गया था. फिल्म उन कथित चर्चाओं पर आधारित थी कि जयपुर के किले से कई ट्रक सोना दिल्ली भेजा गया था.

विद्युत जमवाल की कमांडो-2 कालेधन पर आधारित फिल्म थी जिसको प्रोपेगेंडा फिल्म बताया गया था. कहा गया था कि ये फिल्में सरकार की छवि सुधारने के लिए बनाई जा रही हैं.

2017 में ही इंदु सरकार नाम की भी फिल्म आई जो आपातकाल पर आधारित थी. इस फिल्म में भी कुछ ऐसी बातें और चीजें थीं जिन पर सोशल मीडिया में काफी चर्चाएं हुईं.

तो ऐसी काफी चर्चाएं हैं कि हमारे देश में भी अब प्रोपेगेंडा सिनेमा बन रहा है. आपको क्या लगता है?