पोलर वर्टेक्स: अभी भी वक्त है संभल जाइए, वरना देर हो जाएगी

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देश में अचानक ठंड बढ़ गई है. पिछले दो दिनों से कोहरा भी हो रहा है. पहाड़ी इलाकों में जोरदार बर्फबारी भी हुई है. माना जा रहा है कि ये सब पोलर वर्टेक्स के कारण हो रहा है. पोलर वर्टेक्स यानि उत्तरी ध्रुव से ठंडी हवाएं चल रही हैं जो अमेरिका में कहर बनी हुई हैं और दुनिया के कई हिस्सों में फैल गई हैं.

आपको जान कर हैरानी होगी कि अमेरिका के कई हिस्सों में तापमान माइनस 40 से माइनस 70 डिग्री तक चला गया है. हालत ऐसी है कि लोगों से गहरी सांस ना लेने और कम बोलने को कहा गया है.

सोचिए भला ऐसा क्यों हो रहा है, मौसम में इस कदर चौंकाने वाले परिवर्तन क्यों हो रहे हैं. पिछले कई सालों में इंसान ने जो कुछ भी प्रकृति के साथ किया है ये सब कहीं ना कहीं उसी का परिणाम है.

बड़ी संख्या में दुनिया भर में पेड़ काटे गए हैं. पहाड़ों का सीना चीर कर सड़कें बनाई गई हैं. नदियों के रास्ते बदले गए हैं. खनन का काम बड़े पैमाने पर किया गया है.

प्लास्टिक ने हर कहीं प्रदूषण किया है. पहाड़ों पर गए यात्रियों ने वहां प्लास्टिक फैलाया. समंदर में प्लास्टिक जलीय जीवों की जान ले रहा है. मैदानी इलाकों का भी यही हाल है.

मानिए या मत मानिए मौसम तेजी से बदल रहा है. जैसा मौसम कुछ दशक पहले था वैसा अब नहीं है और जैसा मौसम अब है वैसा कुछ दशकों के बाद नहीं होगा.

अमेरिका से जो तस्वीरें सामने आ रही हैं वो एक फिल्म की याद दिला रही हैं जिसका नाम था ‘द डे आफ्टर टुमारो’. इस फिल्म में विस्तार से पोलर वर्टेक्स के बारे में बताया गया था.

समंदर जम जाते हैं और लोग भी बर्फ बन जाते हैं. पृथ्वी हिमयुग में जाने लगती है. खैर वो तो फिल्म थी. लेकिन आप समझ लीजिए कि अगर इंसान ने कुदरत के साथ छेड़खानी बंद नहीं की तो बेहद गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.