कितना बड़ा है अवैध खनन का कारोबार? कौन लोग शामिल होते हैं इसमें?

हाल ही में अवैध खनन पर अचानक बड़ा हंगामा खड़ा हो गया है. ऐसी खबरें हैं कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी पूछताछ कर सकती है. हमीरपुर की जिलाधिकारी रहीं आईएएस बी.चंद्रकला समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. सवाल ये है कि आखिर ये अवैध खनन का खेल कितना बड़ा है और इसमें कौन लोग शामिल होते हैं?

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत देश के अन्य राज्यों में भी अवैध खनन का खेल खुल कर चल रहा है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय खनन मंत्रालय ने लोकसभा में दिए गए जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश अवैध खनन के मामले में नंबर दो पर है. आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में अवैध उत्खनन के सबसे ज्यादा 31173 मामले महाराष्ट्र से आए, लेकिन एफआईआर 794 में दर्ज हुई. मध्य प्रदेश से 13880 मामले आए, लेकिन एफआईआर दर्ज हुई 516 में, जबकि आंध्र प्रदेश से 9703 मामले आए एफआईआर हुई 3 में.

21 मार्च 2018 को आज तक की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात, एमपी और राजस्थान में अवैध खनन के मामले बहुत बढ़ गए हैं. हालांकि रेवेन्यू भी बढ़ा है. लेकिन यह रिपोर्ट चिंताजनक इसलिए मानी जानी चाहिए क्योंकि अवैध खनन के मामले कम होने की जगह बढ़ते दिखाई दे रहे हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुंडा के डीएसपी जियाउल-हक के कत्ल के तार कहीं ना कहीं अवैध खनन से जुड़े हुए थे.  मुरैना का आईपीएस नरेंद्र हत्याकांड याद है आपको. ट्रैक्टर से कुचल कर उनकी हत्या कर दी गई थी. वह भी अवैध खनन को रोकने का प्रयास कर रहे थे. भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्यांकाड के तार भी अवैध खनन से जुड़ते दिखाई दिए थे.

2017 में गाजीपुर के एक पत्रकार राजेश मिश्रा की हत्या कर दी गई थी. इस मामले के तार भी अवैध खनन से जुड़े निकले थे. भिंड के पत्रकार संदीप शर्मा को ट्रक से कुचल कर मार डाला गया. वह भी अवैध खनन मामले में रिपोर्टिंग कर रहे थे. यानि अवैध खनन को जिसने रोकना चाहा, जिसने छापना चाहा उसको मार डाला गया.

साफ है कि अवैध खनन में एक ऐसी लॉबी सक्रिय रहती है जो या तो खरीद लेती है, डरा देती है या फिर खामोश कर देती है. थोड़ा सा गूगल करने पर पता चलता है कि अवैध खनन एक ऐसा मुद्दा है जिस पर बहुत अधिक काम किया जाना बाकी है. अवैध खनन के मामलों में बहुत हिंसा हुई है जो अलग अलग अखबारों, मीडिया की सुर्खियां बनी है.

राज्यों और केंद्र की सरकार को इस तरह के मामलों में बेहद कड़ी कार्रवाई की जरूरत है तभी इस नेक्सस को तोड़ा जा सकेगा. अवैध खनन करने वाले गिरोह, इनसे जुड़े लोग और इनके समर्थकों से निपटने के लिए भी बहुत काम किया जाना बाकी है. सरकारों को मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी पड़ेगी तभी इन पर काबू पाया जा सकेगा.