चीन के जयकारों से वक्त मिले तो अपने देश में भी अच्छा तलाशिए

हिन्दी भाषा के हर न्यूज़ चैनल, हर अखबार में रोजाना पड़ोसी देश चीन की तारीफें दिखाई देती हैं. ऐसा होना वाजिब भी है. चीन कभी कोई कारनामा करता है तो कभी कोई. जब फटाफट खबरों वाला बुलेटिन आता है तो उसमें कई खबरें ऐसी होती हैं जिनमें इन्हीं कारनामों का जिक्र होता है. अखबार के विदेश वाले पन्ने पर भी ऐसा ही दिखता है. इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन यदि अपने देश की भी कुछ अच्छी बातों और चीजों का जिक्र हो तो बेहतर होगा.

चीन अपनी ब्रैंडिंग कर रहा है शायद. अगर आप गौर से देखेंगे तो पता चलेगा कि वहां से बुरी खबरें कम और अच्छी या प्रभावित करने वाली खबरें ही अधिक सामने आती हैं. एक अभिनेत्री वहां से गायब हो गई, शक था कि उसे सरकार ने ही अगवा करा लिया. दरअसल वहां जो भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है उसको खामोश कर दिया जाता है.

चीन में मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है ये बहुत कम लोगों को पता होगा. हाल ही में वहां एक कानून पास किया गया है जिसके मुताबिक अब बुरका, दाढ़ी, नमाज जैसी चीजों पर पाबंदी लगा दी गई है. उइगर या वीगर मुस्लिम समुदाय को पूरी तरह से बदलने और इस्लाम पर पाबंदी के उद्देश्य से खास किस्म के स्कूल, कॉलेज और शहर बसाए गए हैं. इन कैंप्स में मुस्लिमों को चीन के हिसाब से बदलने को कहा जाता है.

आप गौर करेंगे तो पता चलेगा कि चीन ऐसी खबरें विदेशी मीडिया में प्लांट कर रहा होता है जिनसे उसकी ताकत, हैसियत और दबदबा दिखाई दे. चाहे वो भारत बॉर्डर के पास हफित्ज़र तोपों की तैनाती की बात हो या फिर वहां के राष्ट्रपति के उत्तेजक देशभक्ति से भरे बयान. चाहे वो चांद की डार्क साइड पर स्पेस क्राफ्ट उतारने की बात हो या फिर दुनिया का सबसे बड़ा पुल बनाने जैसी बातें.

इन खबरों से चीन की इमेज दुनिया भर में कामयाब और दबंग देश की बनती है. अपनी इसी दबंगई और एग्रेसिवनेस के कारण चीन ने आसपास के देशों को प्रभुत्व में ले लिया है और भारत पर ऐसा ही करने का प्रयास कर रहा है. आप गूगल में चीन लिखें और समाचार वाले टैब पर क्लिक करें. आपको ऐसी खबरें पढ़ने को मिलेंगी जैसे चीन दुनिया का सबसे महान और शक्तिशाली देश है.

ऐसा लगेगा जैसे वहां ना तो कोई भूख से मरता है और ना ही बीमारी से, ऐसा लगेगा जैसे वहां ना तो अपराध होता है और ना ही सरकार के खिलाफ कोई प्रदर्शन, ऐसा लगेगा जैसे वहां सड़क, बिजली पानी या बेरोजगारी जैसी कोई समस्याएं नहीं हैं. क्या वाकई? क्या दुनिया का कोई देश ऐसा हो सकता है कि वहां कोई समस्या ना हो.

एक वक्त था जब चीन के सामान पर लोग हंसते थे लेकिन आज हालात ऐसे नहीं हैं. आज चीनी मोबाइलों के प्रति इज्जत है और भारतीय मोबाइलों पर शक. चीन ने अपनी मार्केटिंग की है. उसने दुनिया को अपना जो चेहरा दिखाया है वो दबंग और प्रभावशाली है. अब हमें चीन की इसी स्ट्रैटजी पर काम करना चाहिए. हमें भी अपने यहां की अच्छी खबरों को दिखाना चाहिए.

आज दुनिया भर में हमारी पहचान एक ऐसे देश के रूप में है जहां पर जातिवाद, धार्मिक उन्माद चरम पर है और कोई भी कुछ भी बेच सकता है. हमें इस पहचान को बदलना होगा. हमें अलग-अलग समुदाय नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ भारतीय बनना होगा. हमें अपनी कला, अपने हुनर को दुनिया को दिखाना चाहिए. मीडिया को चाहिए कि अब अपने लोगों, अपनी चीजों को प्रमोट करे.